तेरी रफ़्तार गुफ़्तार के शोख़ क़िस्से क़लम कर लिए तेरी बख़्शी हुई नेमतों में तेरा ग़म अकेला रहा
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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सखियों संग रँगने की धमकी सुन कर क्या डर जाऊँगा तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊँगा
Kumar Vishwas
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अब तो लगता है कि आ जाएगी बारी मेरी किस ने दे दी तेरी आँखों को सुपारी मेरी
Abrar Kashif
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मालूम हमें भी हैं बहुत से तेरे क़िस्से पर बात तेरी हम सेे उछाली नहीं जाती
Wasi Shah
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मुझे कहता है झूठी हैं तेरी बेकार सी बातें फ़राज़ मगर लगता है वो मेरी उन्हीं बातों पे मरता है
Ahmad Faraz
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ज़ख़्म फिर हँस दिया पुराना कोई आज अश्कों ने फिर बग़ावत की
Moni Gopal Tapish
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तू समझ सके कभी मुझ को मेरी निगाह से, कभी यूँँ भी हो कि ये ख़्वाब था मेरी आँख में, गई रात चुपके से मर गया
Moni Gopal Tapish
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तू कि रौशन दिए की महक की तरह,सर्द रातों के दिल में लहकता हुआ मैं कि सूरज का टुकड़ा मगर बुझ गया, शाम के दर पे आख़िर सिसकता हुआ
Moni Gopal Tapish
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वो बिकाऊ नहीं उस की कोई मजबूरी है पेट की भट्टी का ईंधन ही बहुत महँगा है
Moni Gopal Tapish
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मेरी फ़ितरत नहीं भूल जाऊँ उसे जो मुक़द्दर में मेरे लिखा ही न हो लाख हक़ में न हो पर मुझे चाहिए आसमानों का रुख़ वो दहकता हुआ
Moni Gopal Tapish
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