थकानें पाँव से चल कर बदन पर फैल जाती हैं मुसलसल ख़्वाब टूटे हैं यहाँ पर दिन निकलने में
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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मुझ को भी उन्हीं में से कोई एक समझ ले कुछ मसअले होते हैं ना जो हल नहीं होते
Ali Zaryoun
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हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं दिल हमेशा उदास रहता है
Bashir Badr
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जिस्म तो बेचे ख़रीदे जा रहे हैं आवरण रिश्तों रिवाज़ों के चढ़ाकर
Umesh Maurya
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वो ख़त भी साथ बूढ़ा हो गया था लिखा पर दे न पाया था उसी को
Umesh Maurya
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यही अड़चन सभी की थी कहीं मन था कहीं तन था
Umesh Maurya
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वो जब आता था सारा घर ही भर जाता था ख़ुशियों से अकेला शख़्स ही सारे ग़मों को सोख लेता था
Umesh Maurya
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ये सारा खेल है बस दो घड़ी का नहीं कोई ठिकाना आदमी का
Umesh Maurya
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