थोड़ी ख़ुशियाँ थोड़ी सी मायूसी है शायद मेरा होना ही मनहूसी है छुप कर मुझ को पढ़ने वालों ध्यान रहे यूँँ छुप कर पढ़ना भी इक जासूसी है
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था
Adeem Hashmi
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उन्हें दिल तख़्त पे बैठा चुके हैं अँगूठी फिर भी वो लौटा चुके हैं सड़क अब गाँव तक तो आ चुकी है मगर इस गाँव से सब जा चुके हैं
Kush Pandey ' Saarang '
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कभी भी जिस्म की बातें बदन का जिक्र ना होगा सो ऐ लड़की ग़ज़ल को तुम कभी डर कर नहीं पढ़ना अगर मैं सेज दिल का कह रहा हूँ, इस ग़ज़ल में तो उसे दिल सेज ही पढ़ना कभी बिस्तर नहीं पढ़ना
Kush Pandey ' Saarang '
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यहाँ सब मंज़िलों की दौड़ में हैं नहीं मालूम कब तक दौड़ना है
Kush Pandey ' Saarang '
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प्यास लगे प्यासे को जब भी हाथ मिरा चुल्लू हो जाए हर के ख़ातिर उठते हैं ये और बड़े बाज़ू हो जाए
Kush Pandey ' Saarang '
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रोने से तो मन हल्का हो जाएगा बाकी ग़म सारे याद रहेंगे तुम को
Kush Pandey ' Saarang '
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