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तिरंगा दिल में है लबों पे हिंदुस्तान रखता हूँ सिपाही हूँ हथेली पे मैं अपनी जान रखता हूँ

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साज़ ख़ामोश कि इक टूटते संगीत के नाम प्यार में हम ने किए गीत समर्पन कितने तौबा ये तमकनत-ए-हुस्न इलाही तौबा एक श्रृंगार को तोड़े गए दर्पन कितने

Shashank Shekhar Pathak

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सितंबर डेट थी सोलह गई थी छोड़कर जब वो यही तारीख़ है वो जो हमेशा याद रहती है

Shashank Shekhar Pathak

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तेरी अंँगड़ाई के आलम का ख़याल आया जब ज़ेहन-ए-वीरांँ में खनकने लगे कंगन कितने

Shashank Shekhar Pathak

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किसी का गर सुकूँ हो तो किसी का मसअला हो तुम दुआ हो तुम दवा हो तुम मरज़ हो तुम बला हो तुम

Shashank Shekhar Pathak

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मिलने आए या न आए मेरे ख़्वाबों में तू तेरे तसव्वुर को मैं ख़्वाब बना लेता हूँ तेरे जाने का ग़म तो है मगर इतना नहीं तेरी तस्वीर से अब काम चला लेता हूँ

Shashank Shekhar Pathak

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