टूटे हुए को ही यहाँ जुड़ने की चाहत होती है सागर को मिलने में ही कब दरिया की आदत होती है
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हार हो जाती है जब मान लिया जाता है जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
Shakeel Azmi
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और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे अपनी दुनिया बुरी लग गई जिस को आबाद करते हुए मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई
Tehzeeb Hafi
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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
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इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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ये दुनिया कितनी प्यारी है इस में ही दुनिया सारी है जीता है उस ने कितना कुछ इक शर्त अभी भी हारी है
Kumar Prem Pinaki
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प्रेम जब मन में हुआ भेद सारे औन हैं कर रहे हैं बात दिल शब्द सारे मौन हैं
Kumar Prem Pinaki
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मन में पहले सौ युद्ध हुए जीते उन सेे तब बुद्ध हुए
Kumar Prem Pinaki
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यादें ही देखो पूरी हैं रूहों के जलने के लिए धोखे यहाँ ज़रूरी हैं यारों सॅंभलने के लिए
Kumar Prem Pinaki
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इक सफ़र ऐसा है जिस में मंज़िल की कोई बात नहीं इक सफ़र ऐसा है जिस में मिलने की कोई रात नहीं
Kumar Prem Pinaki
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