प्रेम जब मन में हुआ भेद सारे औन हैं कर रहे हैं बात दिल शब्द सारे मौन हैं
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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इक सफ़र ऐसा है जिस में मंज़िल की कोई बात नहीं इक सफ़र ऐसा है जिस में मिलने की कोई रात नहीं
Kumar Prem Pinaki
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ये दुनिया कितनी प्यारी है इस में ही दुनिया सारी है जीता है उस ने कितना कुछ इक शर्त अभी भी हारी है
Kumar Prem Pinaki
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पहले हिम्मत बाँधी फिर हिम्मत से दो चार किया क़िस्मत की ऑंधी आई हार नहीं स्वीकार किया
Kumar Prem Pinaki
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संघर्ष बिना जो जीता है वो जीता कोई ख़ास नहीं दुनिया में कोई राम नहीं जिस का अपना वनवास नहीं
Kumar Prem Pinaki
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आइने का सौदा कर मुफ़लिसी में मर गया सब मुखौटे बेच कर हर कोई सँवर गया
Kumar Prem Pinaki
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