पहले हिम्मत बाँधी फिर हिम्मत से दो चार किया क़िस्मत की ऑंधी आई हार नहीं स्वीकार किया
Related Sher
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
1279 likes
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
471 likes
हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
979 likes
होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
145 likes
More from Kumar Prem Pinaki
प्रेम जब मन में हुआ भेद सारे औन हैं कर रहे हैं बात दिल शब्द सारे मौन हैं
Kumar Prem Pinaki
1 likes
इतने चेहरे हैं दुनिया में कोई हर चेहरे पर मरता क्या तुम सेे बेहतर यूँँ न सोचा था बस तुम पर मरता करता क्या
Kumar Prem Pinaki
1 likes
आइने का सौदा कर मुफ़लिसी में मर गया सब मुखौटे बेच कर हर कोई सँवर गया
Kumar Prem Pinaki
1 likes
ये दुनिया कितनी प्यारी है इस में ही दुनिया सारी है जीता है उस ने कितना कुछ इक शर्त अभी भी हारी है
Kumar Prem Pinaki
1 likes
इक सफ़र ऐसा है जिस में मंज़िल की कोई बात नहीं इक सफ़र ऐसा है जिस में मिलने की कोई रात नहीं
Kumar Prem Pinaki
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Kumar Prem Pinaki.
Similar Moods
More moods that pair well with Kumar Prem Pinaki's sher.







