तुम चाँद सितारों की चमक में रहे उलझे तुम ने मिरे महबूब को देखा नहीं होगा
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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वाहिद जमा में और मुज़क्कर में फँस गए कुछ क़ाफ़िए अरुज़ के ख़ंजर में फँस गए कुछ में तो रब्त कुछ में मुअन्नस का ऐब था मेरे हसीन शे'र तो चक्कर में फँस गए
SALIM RAZA REWA
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सब ख़्वाहिशें लपेट के पेटी में रख दिया उम्मीद जो बची थी वो खूँटी पे टाँग दी
SALIM RAZA REWA
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अच्छा किया जो छोड़ दिया साथ हमारा कब तक सॅंभालते ये दिल-ए-बेक़रार को
SALIM RAZA REWA
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ज़ख़्म सिलने में कई ज़ख़्म दिए टाँकों ने कौन से दर्द का इज़हार करूँँ मैं पहले चोट खाया है मेरे जिस्म का हर-इक हिस्सा कौन से हिस्से को बीमार करूँँ मैं पहले
SALIM RAZA REWA
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वो जिसे चाहे अता कर दे ज़माने की ख़ुशी उस के ही हाथों में हैं सारे जहाँ की नेमतें
SALIM RAZA REWA
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