तुम्हारी दीद की ख़्वाहिश लिए वो बैठे हैं तुम्हारी दीद ही बीमार की शिफ़ा ठहरी
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है
Munawwar Rana
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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मुझ को अब चैन से जीने की तमन्ना ही नहीं बस ये ख़्वाहिश है कि अब चैन से मर जाऊँ मैं
Almas Rizvi
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हम कि जी से उतर गए सबके वो कि दिल में समाए जाते हैं
Almas Rizvi
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दिल ए मरीज़ ने दिल से तुझे पुकारा है तू मेरी ज़ीस्त का अब आख़िरी सहारा है
Almas Rizvi
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क़ौल-ए-नबी है जो रखे ज़हरा से दुश्मनी रू-ए-ज़मीं पे चलना भी उस का हराम है
Almas Rizvi
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कोई हिजरत कोई विसाल नहीं ख़्वाब में भी तेरा ख़याल नहीं सी लिए होंठ रब की मर्ज़ी पे मेरे लब पर कोई सवाल नहीं
Almas Rizvi
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