तुम ने बस बाज़ार में जलवे देखे हैं हम ने भीड़ में खोते बच्चे देखे हैं
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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उस लड़की के जाने से बस ये बदला प्यारी-प्यारी ग़ज़लें होना छूट गई
Shaad Imran
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कभी कभी भली आदत भी मार देती है हमारे जैसों को चाहत भी मार देती है
Shaad Imran
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उस लड़की के जाने से बस ये बदला प्यारी-प्यारी ग़ज़लें होना छूट गई
Shaad Imran
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एक तुम सेे ही हम हँस के मिला करते हैं सब के आगे थोड़ी हम ऐसा किया करते हैं
Shaad Imran
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मेरे हाथों में अपना हाथ रख कर कहा उस ने कभी ये हाथ तो न छोड़ोगे
Shaad Imran
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