tu bhi sada hai kabhi chaal badalta hi nahin hum bhi sada hain isi chaal mein aa jate hain
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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मुझे आज़ाद कर दो एक दिन सब सच बता कर तुम्हारे और उस के दरमियाँ क्या चल रहा है
Tehzeeb Hafi
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दानिस्ता मुझ आवारा से टकरा के ये दुनिया कहती है कि अंधे हो दिखाई नहीं देता
Afzal Khan
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तेरे जाने से ज़्यादा हैं न कम पहले थे हम को लाहक़ हैं वही अब भी जो ग़म पहले थे
Afzal Khan
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बना रक्खी हैं दीवारों पे तस्वीरें परिंदों की वगर्ना हम तो अपने घर की वीरानी से मर जाएँ
Afzal Khan
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नहीं था ध्यान कोई तोड़ते हुए सिगरेट मैं तुझ को भूल गया छोड़ते हुए सिगरेट
Afzal Khan
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मैं ख़ुद भी यार तुझे भूलने के हक़ में हूँ मगर जो बीच में कम-बख़्त शा'इरी है ना
Afzal Khan
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