त्यौहारों में भी मिलते हैं वो ग़ैरों की तरह इक घर में रहते हैं पर इक साथ नहीं रहते
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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साथ में मस्ज़िद का मेहमान चला जाएगा जैसे ही माहे रमज़ान चला आएगा
Irshad Siddique "Shibu"
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ज़मीन है तुम सेे घर है बाबू जी वरना सब काग़ज़ भर है बाबू जी फख़्र से अपने सर को उठा के चलिए आप का लड़का शाइ'र है बाबू जी
Irshad Siddique "Shibu"
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रात अगर सोने के लिए है मौला तो फिर इन आँखों को नींद अता कर
Irshad Siddique "Shibu"
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काम नहीं शैतानों का अब दुनिया में इंसानों से हैं इंसान परेशान यहाँ
Irshad Siddique "Shibu"
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सवाल ये कि ये सवाल कौन कर रहा जवाब ये कि इस का कोई भी जवाब नईं
Irshad Siddique "Shibu"
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