उदासी जान की दुश्मन बनी है बहुत ख़तरे में मेरी ज़िंदगी है सहारा चाहिए मुझ को तुम्हारा पता इस वक़्त मेरा बम्बई है
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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हमें अपना बना लो या हमें तुम मार दो लड़की तुम्हारा जो भी दिल चाहे हमें उपहार दो लड़की तुम्हें हम मान कर अपना कई सालों से बैठे हैं हमें बे-हद ज़रूरत है हमें अब प्यार दो लड़की
SAAGAR SINGH RAJPUT
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ज़रा सा ख़फ़ा हूँ मिरे चाँद से मैं ख़फ़ा किस लिए हूँ उसे भी पता है
SAAGAR SINGH RAJPUT
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तुम मिसाल-ए-मुहब्बत हो 'सागर' तुम किसी से भी नफ़रत न करना
SAAGAR SINGH RAJPUT
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तुम मिरे दिल की चाहत हो तुम मिरी जाँ मुहब्बत हो प्यार मैं तुम से करता हूँ इस लिए ख़ूब-सूरत हो
SAAGAR SINGH RAJPUT
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सभी का है वो बस हमारा नहीं यही बात दिल को गवारा नहीं मुहब्बत ने मेरी है मारा मुझे मुझे मौत ने मेरी मारा नहीं
SAAGAR SINGH RAJPUT
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