ulajh rahe hain bahut log meri shohrat se kisi ko yun to koi mujh se ikhtilaf na tha
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
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ज़ेहन से यादों के लश्कर जा चुके वो मेरी महफ़िल से उठ कर जा चुके मेरा दिल भी जैसे पाकिस्तान है सब हुकूमत कर के बाहर जा चुके
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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बीच सड़क इक लाश पड़ी थी और ये लिक्खा था भूक में ज़हरीली रोटी भी मीठी लगती है
Bekal Utsahi
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वो थे जवाब के साहिल पे मुंतज़िर लेकिन समय की नाव में मेरा सवाल डूब गया
Bekal Utsahi
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जब से वो समुंदर पार गया गोरी ने सँवरना छोड़ दिया
Bekal Utsahi
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जिस की हर शाख़ पे राधाएँ मचलती होंगी देखना कृष्ण उसी पेड़ के नीचे होंगे
Bekal Utsahi
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