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उम्र भर हैफ़ शजर शाम-ओ-सहर आँखों ने मक़्तल-ए-क़ल्ब में अरमानों के लाशे देखे

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ज़िंदगी से ख़ुश है कोई ज़िंदगी से तंग है हर किसी का ज़िंदगी जीने का अपना ढंग है मैं ने जो दुनिया को समझा तो मुझे आया समझ निस्फ़ है रंगीन दुनिया निस्फ़ ये बे-रंग है

Shajar Abbas

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ज़ुल्म मज़लूमों पे ढाना छोड़ दो हक़ यतीमों का दबाना छोड़ दो ये नहीं कर सकते तो बेहतर है ये सर को सज्दे में झुकाना छोड़ दो

Shajar Abbas

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ज़ुल्म की मिल के क़मर ऐसे करेंगे ख़म सब दूर हो जाएँगे ये अपने वतन से ग़म सब ख़्वाब अज्दाद ने जो देखा है इक दिन उस की देखना ख़ून से ता'बीर लिखेंगे हम सब

Shajar Abbas

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वो मेरी चूम के पेशानी मुझ सेे कहने लगी 'शजर' तुम्हारा मेरा साथ बस यहीं तक था

Shajar Abbas

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याद है माज़ी का हर लम्हा मुझे अच्छे से मैं ने जब पहली दफ़ा माँ की दुआएँ ली थीं उस ने होंठों से मिरा चूमा था माथा बढ़कर उस ने हाथों से शजर मेरी बलाएँ ली थीं

Shajar Abbas

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