उम्मीद भी नाराज़गी बन जाती है अपना किसी को मानना धोखा है क्या?
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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थी कुछ से प्रीति था कुछ से हमारा बैर कभी अपना कभी अपना बना था ग़ैर कठिन हर रास्ता मंज़िल दिखाएगा मिलेगी क़ामयाबी तुम चलाओ पैर
"Dharam" Barot
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वो समुंदर है वो प्यासा ही रखेगा मैं सिमट जाऊँगा तुझ में ,हूँ मैं तालाब
"Dharam" Barot
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वो ख़ुद को शे'र माने बैठा देखो बताओ ज़िन्दगी सर्कस है उस को
"Dharam" Barot
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न रामायण का मक़्सद राम को सब को बताना था हाँ रामायण का मक़्सद राम हर घर में बनाना था
"Dharam" Barot
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हो गया है आँख से ओझल बताना तो पड़ेगा पास जा कर प्यार चुपके से जताना तो पड़ेगा हाँ युधिष्ठिर ने सिखाया युद्ध में तो बस यहीं है तू न कहना झूठ फिर भी सच छुपाना तो पड़ेगा
"Dharam" Barot
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