उम्र गुज़री दवाएँ करते 'मीर' दर्द-ए-दिल का हुआ न चारा हनूज़
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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अच्छी लड़की ज़िद नहीं करते देखो इश्क़ बुरा होता है
Ali Zaryoun
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ख़ूब-सूरत ये मोहब्बत में सज़ा दी उस ने फिर गले मिल के मेरी उम्र बढ़ा दी उस ने
Manzar Bhopali
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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हम भी गाँव में शाम को बैठा करते थे हम को भी हालात ने बाहर भेजा है
Zahid Bashir
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शाम से कुछ बुझा सा रहता हूँ दिल हुआ है चराग़ मुफ़्लिस का
Meer Taqi Meer
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वस्ल में रंग उड़ गया मेरा क्या जुदाई को मुँह दिखाऊँगा
Meer Taqi Meer
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न रक्खो कान नज़्म-ए-शाइ'रान-ए-हाल पर इतने चलो टुक 'मीर' को सुनने कि मोती से पिरोता है
Meer Taqi Meer
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उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का
Meer Taqi Meer
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मेरे संग-ए-मज़ार पर फ़रहाद रख के तेशा कहे है या उस्ताद
Meer Taqi Meer
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