उसे भारी नहीं लगता किसी का ख़ास होना मुझे तो रोज़ लगता है कि मैं फँस सा गया हूँ
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ज़रूरी तो नहीं उस की हँसी में प्यार ही हो हँसी के इस जहाँ में और भी मतलब बहुत हैं
Vishakt ki Kalam se
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ज़रूरत ढूँढ़ लाती है पता मेरा मुझे अब इस पते से दूर जाना है
Vishakt ki Kalam se
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यहाँ भी मैं तिरा दीदार करने की ख़ुशी में मिटा दूँगा अभी ये रार मरने की ख़ुशी में
Vishakt ki Kalam se
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वही जो मौत से पहले हमारी मौत होती है नहीं होती हैं आँखें नम मगर इक सौत होती है
Vishakt ki Kalam se
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यहाँ आगे किसी की भी निशानी तो नहीं है कहीं ये वो अधूरी सी कहानी तो नहीं है
Vishakt ki Kalam se
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