उस के छोड़ जाने पर ये फ़िक्र क्यूँ करूँ मैं अब हम कहाँ ही एक दूजे के लिए बने ही थे
Related Sher
ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
394 likes
मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
271 likes
उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
361 likes
वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
206 likes
वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
264 likes
More from Amit Kumar
खोज सबने लिया है मगर ज़िंदगी का कोई हल नहीं
Amit Kumar
1 likes
सीख ली मैं ने भी दुनियादारी वर्ना मैं ख़ुद-कुशी से मर जाता
Amit Kumar
0 likes
ये निशानी रख लो अपनी पास अपने क्या करूँँगा अब मैं इक पुर्ज़ा बचाकर
Amit Kumar
1 likes
उस ने बस ऐसे ही कह दिया मिलते हैं और मुझ को लगा था कि सब ठीक है
Amit Kumar
1 likes
सारे पंछी तो आख़िर में उड़ जाते हैं पेड़ बस देखते पेड़ कटते हुए
Amit Kumar
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Amit Kumar.
Similar Moods
More moods that pair well with Amit Kumar's sher.







