उस के क़रीब बैठ के ख़ामोश क्यूँँ रहा दिल चाहता था उस सेे ज़रा गुफ़्तगू करूँँ
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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ज़िंदगी मुझ को तिरी अब तो ज़रूरत ही नहीं उस की तस्वीर ही जीने के लिए काफ़ी है
salman khan "samar"
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यूँँ टुकड़ों में दहलीज़ बना लेने से घर की दीवारें रौनक़ खो बैठी है
salman khan "samar"
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ये भूल है दुनिया की कई साल जिएँगे लगती है मुझे ज़िंदगी लम्हों की कहानी
salman khan "samar"
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पूछूँ जो किसी यार से बारे में तिरे तो हर यार की बातों में तिरी याद है सीकर
salman khan "samar"
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तुम माँग अगर लेते तो जान भी दे देता छीना है मिरा हक़ क्यूँँ मुझ को ये शिकायत है
salman khan "samar"
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