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उस की कई दिनों से कुछ भी ख़बर नहीं दिल भी कई दिनों से बेचैन है मिरा

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किसी को याद कर के मुस्कुराना किसी की याद में सब भूल जाना यही है आशिक़ों का काम यारो इसी को इश्क़ कहता है ज़माना

SAAGAR SINGH RAJPUT

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पड़ेगा कूदना मँझधार में गर चाहिए मोती किसी ने भी नहीं पाया कभी मोती किनारों पर

SAAGAR SINGH RAJPUT

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मुहब्बत है मुझे तुझ सेे मगर मैं कह नहीं सकता मैं तेरे बिन भी ऐ लड़की क़सम से रह नहीं सकता चली आ तू नदी बनकर मुझे अपना बनाने को मैं सागर हूँ मिरी जाँ इस लिए मैं बह नहीं सकता

SAAGAR SINGH RAJPUT

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उदासी जान की दुश्मन बनी है बहुत ख़तरे में मेरी ज़िंदगी है सहारा चाहिए मुझ को तुम्हारा पता इस वक़्त मेरा बम्बई है

SAAGAR SINGH RAJPUT

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मैं आशिक़ हूँ किसी भी हाल में मैं मर नहीं सकता मुहब्बत के जो दुश्मन हैं मैं उन सेे डर नहीं सकता मिरी इस बात का मतलब बहुत ही साफ़ है जानाँ सिवा तेरे किसी से मैं मुहब्बत कर नहीं सकता

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