उस को लगती है हँसी झूटी हँसी खा गई मुझ को मिरी झूटी हँसी
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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यूँँ भी हक़ मुझ पे तेरा बनता है मुझ से जो उम्र में बड़ी है तू
Meem Maroof Ashraf
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इस उम्मीद पे काट रहे हैं जो भी हो अच्छा होता है
Meem Maroof Ashraf
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जो हो मज़लूम क़ैद हो जाए और ज़ालिम खुला टहलता रहे
Meem Maroof Ashraf
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बहुत समझाया था हम को किसी ने मोहब्बत देखना भारी पड़ेगी
Meem Maroof Ashraf
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वो सर को फोड़ना ग़ालिब का समझा जो देखीं मैं ने दीवारें तुम्हारी
Meem Maroof Ashraf
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