उस ने सलीक़े से दुपट्टा ओढ़ा, सुनते ही अज़ान ये देख कर 'काविश' मेरा ईमान ताज़ा हो गया
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आज देखा है तुझ को देर के बा'द आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
Nasir Kazmi
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चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है
Munawwar Rana
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कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़ किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
Gulzar
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सौ सौ उमीदें बँधती है इक इक निगाह पर मुझ को न ऐसे प्यार से देखा करे कोई
Allama Iqbal
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दिल के दरवाज़े भेड़ कर देखो जख़्म सारे उधेड़ कर देखो बंद कमरे में आईने से कभी तुम मेरा जिक्र छेड़ कर देखो
Sandeep Thakur
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साथ था जिन शामों में तू छोड़कर वो अब तो हर शा में सुहानी लिख रहे हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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नज़र में हुस्न लाखों थे हमें पर वो ही प्यारा था
"Nadeem khan' Kaavish"
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नया कोई आशिक़ बनाया गया ये प्यारा सा रिश्ता जलाया गया
"Nadeem khan' Kaavish"
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गले मिलना था मुझ को आज तुम सेे मगर तुम भी ख़ुदा से जा मिले हो
"Nadeem khan' Kaavish"
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सजी थी उदासी की महफ़िल जहाँ वहाँ पर हमें ही बुलाया गया
"Nadeem khan' Kaavish"
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