sherKuch Alfaaz

baghaavat-e-france mein pahli goli paris ki eik vaishya ne apne seene par khaai thi. amritsar mein jaliyaanwaala baagh ke khooni haadse ki ibtida us naujawaan ke khoon se hui thi jo eik vaishya ke batn se tha.

Related Sher

कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ

Ali Zaryoun

521 likes

मैं ज़िन्दगी में आज पहली बार घर नहीं गया मगर तमाम रात दिल से माँ का डर नहीं गया बस एक दुख जो मेरे दिल से उम्र भर न जाएगा उस को किसी के साथ देख कर मैं मर नहीं गया

Tehzeeb Hafi

172 likes

कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है

Jawwad Sheikh

163 likes

आँख में नम तक आ पहुँचा हूँ उस के ग़म तक आ पहुँचा हूँ पहली बार मुहब्बत की थी आख़िरी दम तक आ पहुँचा हूँ

Khalil Ur Rehman Qamar

99 likes

गिला नहीं कि मेरे हाल पर हँसी दुनिया गिला तो ये है कि पहली हँसी तुम्हारी थी

Subhan Asad

37 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Saadat Hasan Manto.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Saadat Hasan Manto's sher.