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आँख में नम तक आ पहुँचा हूँ उस के ग़म तक आ पहुँचा हूँ पहली बार मुहब्बत की थी आख़िरी दम तक आ पहुँचा हूँ

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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा

Santosh S Singh

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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है

Zubair Ali Tabish

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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं

Azhar Iqbal

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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है

Tehzeeb Hafi

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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है

Rahat Indori

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मुझ से दामन न छुड़ा मुझ को बचा कर रख ले मुझ से इक रोज़ तुझे प्यार भी हो सकता है

Khalil Ur Rehman Qamar

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लफ़्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे तू ने जब आख़िरी ख़त मेरा जलाया होगा तू ने जब फूल किताबों से निकाले होंगे देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा

Khalil Ur Rehman Qamar

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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना था वो ख़्वाब में भी मिले मैं नींद नींद को तरसा मगर नहीं सोया ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल था कि थम गई बारिश ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म है कि मैं नहीं रोया

Khalil Ur Rehman Qamar

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अपनी आँखों में 'क़मर' झाँक के कैसे देखूँ मुझ से देखे हुए मंज़र नहीं देखे जाते

Khalil Ur Rehman Qamar

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मेरी बरसों की उदासी का सिला कुछ तो मिले उस से कह दो वो मेरा क़र्ज़ चुकाने आए

Khalil Ur Rehman Qamar

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