आँख में नम तक आ पहुँचा हूँ उस के ग़म तक आ पहुँचा हूँ पहली बार मुहब्बत की थी आख़िरी दम तक आ पहुँचा हूँ
Related Sher
तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
339 likes
बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
325 likes
हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
298 likes
ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
394 likes
गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
263 likes
More from Khalil Ur Rehman Qamar
मुझ से दामन न छुड़ा मुझ को बचा कर रख ले मुझ से इक रोज़ तुझे प्यार भी हो सकता है
Khalil Ur Rehman Qamar
0 likes
लफ़्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे तू ने जब आख़िरी ख़त मेरा जलाया होगा तू ने जब फूल किताबों से निकाले होंगे देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा
Khalil Ur Rehman Qamar
30 likes
ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना था वो ख़्वाब में भी मिले मैं नींद नींद को तरसा मगर नहीं सोया ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल था कि थम गई बारिश ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म है कि मैं नहीं रोया
Khalil Ur Rehman Qamar
52 likes
अपनी आँखों में 'क़मर' झाँक के कैसे देखूँ मुझ से देखे हुए मंज़र नहीं देखे जाते
Khalil Ur Rehman Qamar
25 likes
मेरी बरसों की उदासी का सिला कुछ तो मिले उस से कह दो वो मेरा क़र्ज़ चुकाने आए
Khalil Ur Rehman Qamar
72 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Khalil Ur Rehman Qamar.
Similar Moods
More moods that pair well with Khalil Ur Rehman Qamar's sher.







