वतन के वास्ते क़ुर्बान हो जा हँसते हँसते यही तो ज़िंदगी के वाक़ई में हैं मआ'नी
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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दिल तुम्हारा भी किसी से लगे तो तुम जानो किस तरह हँसते हुए ज़हर पिया जाता है
Harsh saxena
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सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का यही तो वक़्त है सूरज तिरे निकलने का
Shahryar
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इन दिनों दोस्त मेरे सारे ही रूठे हुए हैं मेरे दुश्मन यही मौक़ा है हरा दे मुझ को
Afzal Ali Afzal
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मेरी जवानी को कमज़ोर क्यूँ समझते हो तुम्हारे वास्ते अब भी शबाब बाक़ी है ये और बात है बोतल ये गिर के टूट गई मगर अभी भी ज़रा सी शराब बाक़ी है
Paplu Lucknawi
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वादों से मुकर जाना तो फ़ितरत है तुम्हारी कुछ और नया खेल दिखाओ तो बने बात
Nityanand Vajpayee
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तड़प मेरे कलेजे की समझ भी जाओ जान-ए-जाँ ज़ियादा और खुल कर क्या कहूँ बस घर चले आते
Nityanand Vajpayee
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रहे हो आप काँटों में महीनों तक मेरे दिलबर बस इक शब होने को सोचा था हम-बिस्तर चले आते
Nityanand Vajpayee
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ये क्या किया कि तुम ने सर-ए-आम कह दिया मेरे किए हुए को सही काम कह दिया मैं ने किए हज़ारों करम इस के बावजूद बदनाम बशर ने मुझे बदनाम कह दिया
Nityanand Vajpayee
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झूठ जुमला है कि मर्दों को नहीं होता है दर्द हर बशर की रूह को ग़म सालता तो ख़ूब है दोस्ती कर ली हो जिसने रंज-ओ-ग़म की शाम से दर्द ही दुश्मन है उसका दर्द ही महबूब है
Nityanand Vajpayee
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