मेरी जवानी को कमज़ोर क्यूँ समझते हो तुम्हारे वास्ते अब भी शबाब बाक़ी है ये और बात है बोतल ये गिर के टूट गई मगर अभी भी ज़रा सी शराब बाक़ी है
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तुम्हारे पाँव क़सम से बहुत ही प्यारे हैं ख़ुदा करे मेरे बच्चों की इन में जन्नत हो
Rafi Raza
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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उन के गेसू खुलें तो यार बने बात मेरी इक रबर बैंड ने जकड़ी हुई है रात मेरी
Zubair Ali Tabish
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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मैं क्या करूँँ मेरी बेगम सुहाग ढूँढ़े है मेरे बुझे हुए चूल्हे में आग ढूँढ़े है वो दिन गए कि उड़ाते थे फ़ाख़्ताएँ हम सपेरा चूहे के इक बिल में नाग ढूँढ़े है
Paplu Lucknawi
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जिस फ़िल्म का हीरो मुझे होना था ऐ पपलू उस फिल्म के दो दिन से टिकट बेच रहा हूँ हर काम पुलिस वालों की मर्ज़ी से करूँँगा दारू भी मैं थाने के निकट बेच रहा हूँ
Paplu Lucknawi
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न तेरे आने से मेरा शबाब लौटा है न दिल लगाने से मेरा शबाब लौटा है क़सम ख़ुदा की बताता हूँ राज़ ये तुम को नहारी खाने से मेरा शबाब लौटा है
Paplu Lucknawi
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ये इश्क़-विश्क़ का क़िस्सा तमाम हो जाए सफ़ेद दाढ़ी हवस की ग़ुलाम हो जाए जवान लड़कियों बूढ़ों से तुम रहो हुश्यार न जाने कौन कहाँ आसाराम हो जाए
Paplu Lucknawi
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कोई भी रोक न पाता, गुज़र गया होता मेरा नसीब-ए-मोहब्बत सँवर गया होता न आईं होती जो बेग़म मेरी अयादत को मैं अस्पताल की नर्सों पर मर गया होता
Paplu Lucknawi
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