sherKuch Alfaaz

कोई भी रोक न पाता, गुज़र गया होता मेरा नसीब-ए-मोहब्बत सँवर गया होता न आईं होती जो बेग़म मेरी अयादत को मैं अस्पताल की नर्सों पर मर गया होता

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मैं क्या करूँँ मेरी बेगम सुहाग ढूँढ़े है मेरे बुझे हुए चूल्हे में आग ढूँढ़े है वो दिन गए कि उड़ाते थे फ़ाख़्ताएँ हम सपेरा चूहे के इक बिल में नाग ढूँढ़े है

Paplu Lucknawi

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खद्दर पहन के बेच रहा था शराब वो देखा मुझे तो हाथ में झंडा उठा लिया मैं भी कोई गँवार सिपाही न था जनाब मैं ने भी जाम फेंक के डंडा उठा लिया

Paplu Lucknawi

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जिस फ़िल्म का हीरो मुझे होना था ऐ पपलू उस फिल्म के दो दिन से टिकट बेच रहा हूँ हर काम पुलिस वालों की मर्ज़ी से करूँँगा दारू भी मैं थाने के निकट बेच रहा हूँ

Paplu Lucknawi

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मुत्तकी हो गया ख़ौफ़-ए-बीवी से मैं अब इबादत का सौदा मेरे सर में है मैं ने दाढ़ी बढ़ाई तो कहने लगी अब कमीना ये हूरों के चक्कर में है

Paplu Lucknawi

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न तेरे आने से मेरा शबाब लौटा है न दिल लगाने से मेरा शबाब लौटा है क़सम ख़ुदा की बताता हूँ राज़ ये तुम को नहारी खाने से मेरा शबाब लौटा है

Paplu Lucknawi

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