sherKuch Alfaaz

जिस फ़िल्म का हीरो मुझे होना था ऐ पपलू उस फिल्म के दो दिन से टिकट बेच रहा हूँ हर काम पुलिस वालों की मर्ज़ी से करूँँगा दारू भी मैं थाने के निकट बेच रहा हूँ

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मैं क्या करूँँ मेरी बेगम सुहाग ढूँढ़े है मेरे बुझे हुए चूल्हे में आग ढूँढ़े है वो दिन गए कि उड़ाते थे फ़ाख़्ताएँ हम सपेरा चूहे के इक बिल में नाग ढूँढ़े है

Paplu Lucknawi

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न तेरे आने से मेरा शबाब लौटा है न दिल लगाने से मेरा शबाब लौटा है क़सम ख़ुदा की बताता हूँ राज़ ये तुम को नहारी खाने से मेरा शबाब लौटा है

Paplu Lucknawi

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मसाइल तो बहुत से हैं मगर बस एक ही हल है सहरस शाम तक सर मेरा है बेगम की चप्पल है मेरे मालिक भला इस सेे बुरी भी क्या सज़ा होगी मेरा शादीशुदा होना ही दोज़ख़ की रिहर्सल है

Paplu Lucknawi

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मुत्तकी हो गया ख़ौफ़-ए-बीवी से मैं अब इबादत का सौदा मेरे सर में है मैं ने दाढ़ी बढ़ाई तो कहने लगी अब कमीना ये हूरों के चक्कर में है

Paplu Lucknawi

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पैसा कमाने आते हैं सब राजनीति में आता नहीं है कोई भी खोने के वास्ते छम्मो का मुजरा सुनते हैं नेता जो रात भर संसद भवन में आते हैं सोने के वास्ते

Paplu Lucknawi

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