विरह पे मौन हो जाती हैं उन सबकी ज़बानें जो हर कविता मिलन पे वार देते हैं यहाँ पे
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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हार हो जाती है जब मान लिया जाता है जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
Shakeel Azmi
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ज़बाँ में चाशनी रखने लगे हम यही दस्तूर है दुनिया का साहब
Kush Pandey ' Saarang '
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शराफ़त ठीक पर इतनी न होनी चाहिए समय के साथ ख़ुद को भी बदलते जाइए यही हुश्यार होने का तरीका है यहाँ हमारी मानिए तो ख़ूब धोखे खाइए
Kush Pandey ' Saarang '
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यक़ीं करते हुए भी डर रहा हूँ यक़ीं ने हाल ऐसा कर दिया है
Kush Pandey ' Saarang '
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विरह को छोड़ देती हो फ़क़त श्रृंगार लिखती हो विरह के गीत लिखता मैं जहाँ तुम प्यार लिखती हो
Kush Pandey ' Saarang '
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जिस्म की हसरत मिट्टी में मिल जाएगी प्यार करोगे जिस दिन साहब दिल से तुम
Kush Pandey ' Saarang '
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