शराफ़त ठीक पर इतनी न होनी चाहिए समय के साथ ख़ुद को भी बदलते जाइए यही हुश्यार होने का तरीका है यहाँ हमारी मानिए तो ख़ूब धोखे खाइए
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ये गूँगों की महफ़िल है निकलना ही पड़ेगा क्या इतनी ख़ता कम है कि हम बोल पड़े हैं
Waseem Barelvi
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ये कहाँ की रीत है जागे कोई सोए कोई रात सब की है तो सब को नींद आनी चाहिए
Madan Mohan Danish
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क़स में, वादे, दरवाज़े तो ठीक हैं पर ख़ामोशी को तोड़ नहीं सकता हूँ मैं
Tanoj Dadhich
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साल के तीन सौ पैंसठ दिन में एक भी रात नहीं है उस की वो मुझे छोड़ दे और ख़ुश भी रहे इतनी औक़ात नहीं है उस की
Muzdum Khan
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तुम्हारे पास आते हैं तो साँसें भीग जाती हैं मोहब्बत इतनी मिलती है कि आँखें भीग जाती हैं तबस्सुम इत्र जैसा है हँसी बरसात जैसी है वो जब भी बात करती है तो बातें भीग जाती हैं
Aalok Shrivastav
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ज़बाँ में चाशनी रखने लगे हम यही दस्तूर है दुनिया का साहब
Kush Pandey ' Saarang '
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सियासी तख़्त पे बैठे हुए हो तभी इतना यहाँ ऐंठे हुए हो
Kush Pandey ' Saarang '
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सियासी जो परचम उठाए हुए हो मियाँ ख़ुद को क्या तुम बनाए हुए हो वही तो नहीं सुन रहा बात तेरी जिसे वोट देकर जिताए हुए हो
Kush Pandey ' Saarang '
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तमाशे को ये दुनिया देखती है विदूषक हँस के रोता भी है छुप कर
Kush Pandey ' Saarang '
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उसे भी रोकते किस बात से हम लड़े तन्हा यहाँ हर रात से हम
Kush Pandey ' Saarang '
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