वो अपनी नफ़रतों को कहाँ जा के बाँटता उस के लिए तो शहर में आसान मैं ही था
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नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घू में लेकिन अब घर अच्छा लगता है
Nida Fazli
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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जो चुप रहा तो वो समझेगा बद-गुमान मुझे बुरा भला ही सही कुछ तो बोल आऊँ मैं
Iftikhar Imam Siddiqi
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ग़म ही चाँदी है ग़म ही सोना है ग़म न होगा तो क्या ख़ुशी होगी
Iftikhar Imam Siddiqi
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वो ख़्वाब था बिखर गया ख़याल था मिला नहीं मगर ये दिल को क्या हुआ क्यूँँ बुझ गया पता नहीं
Iftikhar Imam Siddiqi
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