वो बादलों की गरज थी कि बिजलियों की चमक वो जब ज़मीन पे उतरी तुम्हारी ज़ात हुई
Related Sher
नींद भी जागती रही पूरे हुए न ख़्वाब भी सुब्ह हुई ज़मीन पर रात ढली मज़ार में
Adil Mansuri
32 likes
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता
Nida Fazli
36 likes
सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी तुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी
Jaan Nisar Akhtar
45 likes
ये कितनी लाशें सहेजे किसे कहाँ रक्खें कि तंग आ गई है अब ज़मीन लोगों से
Varun Anand
50 likes
सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के 'फ़िराक़' क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया
Firaq Gorakhpuri
48 likes
More from Dharmesh bashar
क्या हुईं वो क़ुर्बतें अहबाब को क्या हो गया आते-जाते मिल गईं आँखें तो मिलना हो गया
Dharmesh bashar
3 likes
ये ज़िन्दगी तो हम को कभी की भुला चुकी अब क्या करें कि मौत भी आँखें चुराए है
Dharmesh bashar
4 likes
जाएज़ा लेता है फ़ज़ाओं का हर परिंदा उड़ान से पहले
Dharmesh bashar
3 likes
कितने सैयारे ख़ला में घूमते इन पतंगों को उड़ाता कौन है
Dharmesh bashar
3 likes
अब भी कुछ ऐसे हैं गुलज़ार पुराने बाक़ी सामने जिन के है कम ताज़ा गुलाबों की महक सुन लिए कुहना तराने जो किसी बुलबुल के शोर से कम न लगेगी ये परिंदों की चहक
Dharmesh bashar
3 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Dharmesh bashar.
Similar Moods
More moods that pair well with Dharmesh bashar's sher.







