वो जब जब भी लबे नाज़ुक से मेरा नाम लेते हैं तो पहले बढ़ के हम अपना कलेजा थाम लेते हैं
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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पलकों पे कुछ चराग़-ए-तमन्ना लिए हुए आँखों को ख़्वाब-ए-सुबह दिखाता रहा हूँ मैं
Altaf Iqbal
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ज़र्फ़ दरकार है यारो ये कोई खेल नहीं ज़ोरे सैलाब को आँखों में छुपा कर रखना
Altaf Iqbal
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सानेहा ऐसा गुज़र जाए तो फिर शे'र कहें उन की सुरत जो नज़र आए तो फिर शे'र कहें बस यही शेवा हमारा है के हम अहले जूनू दर्द की हद से गुज़र जाए तो फिर शे'र कहें
Altaf Iqbal
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अहदे माज़ी में थे ग़ालिब, दोस्तों देखो ज़रा नाम अपना भी कहीं पर दर्ज मुस्तक़बिल में है
Altaf Iqbal
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उस मोड़ पे गुज़री है मेरी ज़िन्दगी 'अल्ताफ़' जिस मोड़ पे पल भर कोई ठहरा नहीं करते
Altaf Iqbal
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