वफ़ा का ज़ोर अगर बाज़ुओं में आ जाए चराग़ उड़ता हुआ जुगनुओं में आ जाए खिराजे इश्क़, कहीं जा के तब अदा होगा हमारा ख़ून अगर आँसुओं में आ जाए
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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ख़ाक हो जाएँगे हम ख़ाक में मिल कर तेरी तुझ सेे रिश्ता न कभी अरज़े वतन टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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इतनी दिलकश थी गुफ़्तगू उस की चाय का कप भी सुन रहा था उसे
Hashim Raza Jalalpuri
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गरेबाँ चाक, धुआँ, जाम, हाथ में सिगरेट शब-ए-फ़िराक़, अजब हाल में पड़ा हुआ हूँ
Hashim Raza Jalalpuri
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मुसाफ़िरों के दिमाग़ों में डर ज़ियादा है न जाने वक़्त है कम या सफ़र ज़ियादा है
Hashim Raza Jalalpuri
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