इतनी दिलकश थी गुफ़्तगू उस की चाय का कप भी सुन रहा था उसे
Related Sher
भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
105 likes
ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
Jaun Elia
161 likes
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
368 likes
ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
394 likes
More from Hashim Raza Jalalpuri
ख़ाक हो जाएँगे हम ख़ाक में मिल कर तेरी तुझ सेे रिश्ता न कभी अरज़े वतन टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
24 likes
वफ़ा का ज़ोर अगर बाज़ुओं में आ जाए चराग़ उड़ता हुआ जुगनुओं में आ जाए खिराजे इश्क़, कहीं जा के तब अदा होगा हमारा ख़ून अगर आँसुओं में आ जाए
Hashim Raza Jalalpuri
25 likes
गरेबाँ चाक, धुआँ, जाम, हाथ में सिगरेट शब-ए-फ़िराक़, अजब हाल में पड़ा हुआ हूँ
Hashim Raza Jalalpuri
44 likes
मुसाफ़िरों के दिमाग़ों में डर ज़ियादा है न जाने वक़्त है कम या सफ़र ज़ियादा है
Hashim Raza Jalalpuri
46 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Hashim Raza Jalalpuri.
Similar Moods
More moods that pair well with Hashim Raza Jalalpuri's sher.







