ख़ाक हो जाएँगे हम ख़ाक में मिल कर तेरी तुझ सेे रिश्ता न कभी अरज़े वतन टूटेगा
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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वफ़ा का ज़ोर अगर बाज़ुओं में आ जाए चराग़ उड़ता हुआ जुगनुओं में आ जाए खिराजे इश्क़, कहीं जा के तब अदा होगा हमारा ख़ून अगर आँसुओं में आ जाए
Hashim Raza Jalalpuri
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इतनी दिलकश थी गुफ़्तगू उस की चाय का कप भी सुन रहा था उसे
Hashim Raza Jalalpuri
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गरेबाँ चाक, धुआँ, जाम, हाथ में सिगरेट शब-ए-फ़िराक़, अजब हाल में पड़ा हुआ हूँ
Hashim Raza Jalalpuri
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मुसाफ़िरों के दिमाग़ों में डर ज़ियादा है न जाने वक़्त है कम या सफ़र ज़ियादा है
Hashim Raza Jalalpuri
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