मुसाफ़िरों के दिमाग़ों में डर ज़ियादा है न जाने वक़्त है कम या सफ़र ज़ियादा है
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है मिल जाए तो बात वगैरा करती है बारिश मेरे रब की ऐसी नेमत है रोने में आसानी पैदा करती है
Tehzeeb Hafi
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ख़ाक हो जाएँगे हम ख़ाक में मिल कर तेरी तुझ सेे रिश्ता न कभी अरज़े वतन टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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वफ़ा का ज़ोर अगर बाज़ुओं में आ जाए चराग़ उड़ता हुआ जुगनुओं में आ जाए खिराजे इश्क़, कहीं जा के तब अदा होगा हमारा ख़ून अगर आँसुओं में आ जाए
Hashim Raza Jalalpuri
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इतनी दिलकश थी गुफ़्तगू उस की चाय का कप भी सुन रहा था उसे
Hashim Raza Jalalpuri
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गरेबाँ चाक, धुआँ, जाम, हाथ में सिगरेट शब-ए-फ़िराक़, अजब हाल में पड़ा हुआ हूँ
Hashim Raza Jalalpuri
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