वक़्त-ए-रुख़्सत थी नमी उस की भी आँखों में जब प्यार 'आसिफ़' का भला कैसे भुलाया होगा
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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आँखों में आए लम्हे को बैठे निकल गए मैं जागा इस से पहले ही सपने निकल गए
Aasif Munawwar
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प्यार तो हर कोई कर लेता है लेकिन 'आसिफ़' उस का इज़हार भी करने को जिगर लगता है
Aasif Munawwar
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चंद लुक़्में, लिबास और मस्कन इतनी होती है आदमी की भूक
Aasif Munawwar
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एक लड़की उदास रहती है जो मिरे आस पास रहती है
Aasif Munawwar
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लफ़्ज़ों के वार करते हो तुम भी अजीब हो कह दो न साफ़-साफ़ मिरी जान चाहिए
Aasif Munawwar
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