प्यार तो हर कोई कर लेता है लेकिन 'आसिफ़' उस का इज़हार भी करने को जिगर लगता है
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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वक़्त-ए-रुख़्सत थी नमी उस की भी आँखों में जब प्यार 'आसिफ़' का भला कैसे भुलाया होगा
Aasif Munawwar
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आँखों में आए लम्हे को बैठे निकल गए मैं जागा इस से पहले ही सपने निकल गए
Aasif Munawwar
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चंद लुक़्में, लिबास और मस्कन इतनी होती है आदमी की भूक
Aasif Munawwar
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एक लड़की उदास रहती है जो मिरे आस पास रहती है
Aasif Munawwar
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लफ़्ज़ों के वार करते हो तुम भी अजीब हो कह दो न साफ़-साफ़ मिरी जान चाहिए
Aasif Munawwar
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