चंद लुक़्में, लिबास और मस्कन इतनी होती है आदमी की भूक
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न करो बहस हार जाओगी हुस्न इतनी बड़ी दलील नहीं
Jaun Elia
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तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया
Tehzeeb Hafi
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इतनी जल्दी क्या रहती है मिलने की सूट गुलाबी और दुप्पटा काला है
Tanoj Dadhich
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ख़ुदा की शा'इरी होती है औरत जिसे पैरों तले रौंदा गया है तुम्हें दिल के चले जाने पे क्या ग़म तुम्हारा कौन सा अपना गया है
Ali Zaryoun
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साल के तीन सौ पैंसठ दिन में एक भी रात नहीं है उस की वो मुझे छोड़ दे और ख़ुश भी रहे इतनी औक़ात नहीं है उस की
Muzdum Khan
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वक़्त-ए-रुख़्सत थी नमी उस की भी आँखों में जब प्यार 'आसिफ़' का भला कैसे भुलाया होगा
Aasif Munawwar
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आँखों में आए लम्हे को बैठे निकल गए मैं जागा इस से पहले ही सपने निकल गए
Aasif Munawwar
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प्यार तो हर कोई कर लेता है लेकिन 'आसिफ़' उस का इज़हार भी करने को जिगर लगता है
Aasif Munawwar
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लफ़्ज़ों के वार करते हो तुम भी अजीब हो कह दो न साफ़-साफ़ मिरी जान चाहिए
Aasif Munawwar
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एक लड़की उदास रहती है जो मिरे आस पास रहती है
Aasif Munawwar
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