वो चार-दिन रही फ़िराक़ की गिरिफ़्त में फिर उस पे मेरे हिज्र का असर नहीं बचा
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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ये फ़क़त माँग में भरने से शाज़ सिन्दूर हो जाता है
Milan Gautam
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यारो मैं इश्क़ में हुआ हूँ जब से मुब्तला यमराज मेरी जान के चक्कर लगाते हैं
Milan Gautam
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ये ज़ुल्मतें कि चराग़ों पे हावी हो रही हैं वो हुस्न सामने आए सियाही छट जाए
Milan Gautam
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प्यार वो जज़्बा है जिस में केवल ग़म का बोझा ढोना होता है
Milan Gautam
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प्यार मोहब्बत के यातायात में सफ़र करना इतनी चौड़ी सबके दिल की सड़क नहीं होती
Milan Gautam
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