याद तन्हाई में आता है तुम्हारा कहना दीप तुम को कभी तन्हा नहीं छोड़ूँगी मैं
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम को यारों ने याद भी न रखा 'जौन' यारों के यार थे हम तो
Jaun Elia
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ज़ख़्म ऐसा दो मुझे अब इश्क़ में, के नील ही पड़ जाए मेरे दिल के अंदर
Dipendra Singh 'Raaz'
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मैं कैसे चैन से सोऊँ यहाँ पर तेरी यादों से कमरा भर गया है
Dipendra Singh 'Raaz'
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तुम छोड़ गए तो मुझे एहसास हुआ ये हाथों की पकड़ मेरी ही मज़बूत नहीं थी
Dipendra Singh 'Raaz'
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जिन को पनाह नहीं मिलती है बाँहों में रक़्स किया करते हैं वो सहराओं में
Dipendra Singh 'Raaz'
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रहने लगे उदास तो लिखने लगे थे शे'र सूखे हुए थे पेड़ सो कश्ती बना दिया दिन भर लगा के उस को बनाया था इक मकाँँ साहिल की एक मौज़ ने मिट्टी बना दिया
Dipendra Singh 'Raaz'
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