यक़ीन-ओ-रब्त ये मशरूत से होते जहाँ बाज़ार होता ज़िंदगी का फिर
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी यूँँ कोई बे-वफ़ा नहीं होता
Bashir Badr
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जहाँ से जी न लगे तुम वहीं बिछड़ जाना मगर ख़ुदा के लिए बे-वफ़ाई न करना
Munawwar Rana
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उदासी का सबब दो चार ग़म होते तो कह देता फ़ुलाँ को भूल बैठा हूँ फ़ुलाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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जब भी उस की गली में भ्रमण होता है उस के द्वार पर आत्मसमर्पण होता है किस किस से तुम दोष छुपाओगे अपने प्रिये अपना मन भी दर्पण होता है
Azhar Iqbal
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ज़िंदगी की तलाश करता हूँ रोज़ हो कर हताश मरता हूँ
Vinod Ganeshpure
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यूँँ जहाँ में कहीं पर खड़ा हो गया आदमी फिर वहीं पे बड़ा हो गया
Vinod Ganeshpure
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यूँँ मुझे देख कर लगा होगा है बड़ी ज़िंदगी हसीं अपनी
Vinod Ganeshpure
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ज़ख़्म तुम भी कुरेद लो मेरे आज के बा'द ये नहीं होगा ज़िंदगी दर्द भूल जाएगी प्यार अब यार से नहीं होगा
Vinod Ganeshpure
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ज़िक्र मेरा अगर किया उस ने आज फिर रो वहीं दिया उस ने
Vinod Ganeshpure
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