ये जिस आग की बात तुम कर रहे हो तुम उस आग का तो धुआँ भी नहीं हो
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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तस्वीर इक जला के बुझाता रहा हूँ मैं उस के ही पास लौट के जाता रहा हूँ मैं ये ना-तमाम ख़्वाब हक़ीक़त हों किस तरह हर पल तो अपनी नींद उड़ाता रहा हूँ मैं
Hasan Raqim
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लिखा था जिस के मुक़द्दर में वो, उसी का हुआ वो मेरा होना नहीं था मेरा हुआ भी नहीं
Hasan Raqim
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किसी की मंज़िलों का अक्स बनके भी तो देख किसी को रास्ता होकर गुज़र भी जाने दे
Hasan Raqim
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मेरी आँखों में बनकर ख़्वाब मुझ को आज़माती हैं तेरी यादें अभी तक रातों की नींदें उड़ाती हैं वो जिन अलमारियों में मैं तुम्हारी यादें रखता था उन्हीं अलमारियों में अब किताबें धूल खाती हैं
Hasan Raqim
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जो लोग वक़्त के चलते यहाँ बदलते नहीं वो गिर के उठते है लेकिन कभी सँभलते नहीं मैं एक तरफ़ा मुहब्बत की क्या मिसालें दूँ ये लोग आग पे चलते हैं और जलते नहीं
Hasan Raqim
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