मेरी आँखों में बनकर ख़्वाब मुझ को आज़माती हैं तेरी यादें अभी तक रातों की नींदें उड़ाती हैं वो जिन अलमारियों में मैं तुम्हारी यादें रखता था उन्हीं अलमारियों में अब किताबें धूल खाती हैं
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो कितने सच्चे दिल से झूठी क़स में खाती हो
Tehzeeb Hafi
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तस्वीर इक जला के बुझाता रहा हूँ मैं उस के ही पास लौट के जाता रहा हूँ मैं ये ना-तमाम ख़्वाब हक़ीक़त हों किस तरह हर पल तो अपनी नींद उड़ाता रहा हूँ मैं
Hasan Raqim
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अपनी आदत है अगर होना तो बस एक दिल का कहने वाले इसी आदत को वफ़ा कहते हैं
Hasan Raqim
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न हाथ आगे करूँँ सामने सिवाए तेरे न इतना देना कि मुझ को ग़ुरूर आ जाए
Hasan Raqim
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जो लोग वक़्त के चलते यहाँ बदलते नहीं वो गिर के उठते है लेकिन कभी सँभलते नहीं मैं एक तरफ़ा मुहब्बत की क्या मिसालें दूँ ये लोग आग पे चलते हैं और जलते नहीं
Hasan Raqim
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ब-मंज़िल पर हूँ मगर ये मकाँ मंज़िल नहीं लगता सफ़र को भी मिरा अब कोई मुस्तक़बिल नहीं लगता
Hasan Raqim
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