ये ख़ुदा तू तो ये जानता है कितने तरसे हैं इक शख़्स को हम
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में
Fahmi Badayuni
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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वो मैं था जो उस की हर हाँ में शामिल नइँ था बस इस कारण ही तो मैं उस के क़ाबिल नइँ था उस दिल के दफ़्तर में मिल तो जाता काम मुझे हाँ पास मेरे रिश्वत में देने को दिल नइँ था
Jitendra "jeet"
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ये अमीरी इश्क़ पर भारी हुई जब से सो लगा है जिस्म का बाज़ार कमरे में
Jitendra "jeet"
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लोग आए खेल खेले चल दिए हम थे तन्हा और तन्हा हो गए
Jitendra "jeet"
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गीत मुक्तक सभी वो भुलाए गए होंठों तक आए पर जो न गाए गए तब से आँखों का नींदों से नाता नहीं जबसे गोदी में सर रख सुलाए गए
Jitendra "jeet"
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हम भटकते रहे हैं यहाँ दर-ब-दर तुम ने आ कर के जीवन सँवारा प्रिये जब मेरे दर्द की इंतिहाँ हो गई मैं ने पन्नों पे तुम को उतारा प्रिये
Jitendra "jeet"
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