गीत मुक्तक सभी वो भुलाए गए होंठों तक आए पर जो न गाए गए तब से आँखों का नींदों से नाता नहीं जबसे गोदी में सर रख सुलाए गए
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या'नी तुम वो हो वाक़ई हद है मैं तो सच-मुच सभी को भूल गया
Jaun Elia
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सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
Nida Fazli
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छू लेने दो नाज़ुक होंठों को, कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये क़ुदरत ने जो हम को बख़्शा है, वो सब सेे हसीं ईनाम हैं ये
Sahir Ludhianvi
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हर गीत में हर बार गाऊँगा तुझे अपनी ग़ज़ल में गुनगुनाऊँगा तुझे तू ईद है और तू ही दीवाली मेरी मैं हर बरस यूँँही मनाऊँगा तुझे
Krishnakant Kabk
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गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए ज़ख़्म यूँँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न गए आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए
Farhat Abbas Shah
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ये ख़ुदा तू तो ये जानता है कितने तरसे हैं इक शख़्स को हम
Jitendra "jeet"
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मैं तो अब शाम का ढलते सूरज सा हूँ तुम मेरी ज़िन्दगी का उजाला बनो मैं इबादत करूँँ हर घड़ी हर पहर तुम मेरी बंदगी तुम शिवाला बनो
Jitendra "jeet"
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मेरी आँखों में आँसू हैं लबों पर है हँसी तेरे ग़मों से गर पड़े पाला तो मुझ को याद कर लेना न बाज़ी जीत पाए हम अगर दूजी मोहब्बत में तेरे हिस्से में आऊँ मैं यही फ़रियाद कर लेना
Jitendra "jeet"
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ये अमीरी इश्क़ पर भारी हुई जब से सो लगा है जिस्म का बाज़ार कमरे में
Jitendra "jeet"
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अपने दिल की में पीड़ा बताऊँ किसे हो रहे हैं ग़लत आकलन सब मेरे और कब तक सहूँ दिल पे आघात को प्रेम में खो रहे संकलन सब मेरे
Jitendra "jeet"
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