ये तेरी याद है या तू के सच में लौट आई है ये आज किस ने तेरे लहजे में मुझे पुकारा है
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुझे गर शर्म आती है पुराने इन लिबासों पे तो मेरी जाँ सड़क पे लोगों को तू बे-लिबादा देख
karan singh rajput
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ये इश्क़ का सफ़र तो ठीक पर रास्ता अजीब है
karan singh rajput
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न पूछो तुम अभी हम लोग काबिल किस तरह होंगे समझ लो यूँँ दिए तूफ़ाँ में जलते जिस तरह होंगे बिछड़के लोग सब मरते नहीं तुम सोचती हो ये मगर मैं सोचता हूँ के वो जीते किस तरह होंगे
karan singh rajput
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तू ने ही तो चाहा था के मैं तेरा बनके रहूँ बस मैं ने सो तेरी ख़ुशी के वास्ते हर शय भुला दी
karan singh rajput
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यही इक खासियत है मुझ में शायद कि अपना ग़म छुपा लेता हूँ सब सेे
karan singh rajput
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