उठते हैं बुलबुले जो सभी इंतिशार के रह-रह के याद क़िस्से दिलाते हैं हार के मुझ को यक़ीन उस पे ज़्यादा है इस लिए देखे हैं मैं ने मोजिज़े परवरदिगार के
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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ये मान लिया मैं ने बदला हूँ बहुत लेकिन ये ठीक है क्या पहले जैसी ही रही हो तुम
Prashant Sitapuri
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याँ जब भी गुलाबों को मैं हाथ लगाता हूँ क्या जान मिरी वाँ तेरे होंठ लरज़ते हैं
Prashant Sitapuri
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इस ज़माने के तरीक़ों से सताया तो गया है ग़म ज़ियादा हैं मगर जाँ मुस्कुराया तो गया है
Prashant Sitapuri
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पहला सितम शफ़ा की दवा एक शख़्स था दूजा सितम है ये कि दवा कुछ न कर सकी
Prashant Sitapuri
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मुझ सेे मिली तो सारा गुमाँ ख़ाक हो गया जलते रहे चराग़ हवा कुछ न कर सकी
Prashant Sitapuri
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